ज्योतिष शास्त्र और कर्म

अक्सर आपने देखा होगा कुछ ज्ञानी सज्जन कर्म का ज्ञान देते नज़र आते हैं वह कर्म को ही प्रधान मानते हैं- भाग्य या भाग्य बताने वाले शास्त्रो की निंदा ही करते हैं -तो आज उन ज्ञानी सज्जनो को कर्म के ज्ञान से आगे का ज्ञान देते हुए यह पोस्ट लिख रहा हूँ -क्योंकि वह अर्ध सत्य ही कहते हैं –

कर्म मनुष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है बिना कर्म के कुछ भी संभव नहीं यह अटल सत्य है -गीता में भगवन कृष्ण ने भी अर्जुन को कर्म योग का ज्ञान देते हुए कहा है की अर्जुन कर्म करना ही तेरा धर्म है और कर्म करना ही मेरा धर्म है -मैं समस्त तत्वो का ज्ञात मैं भी कर्म से बांध हुआ हूँ मुझसे ही यह सृष्टि है फिर भी मैं कर्म से बांध हुआ हूँ यदि मैं कर्म करना त्याग दूँ तो समस्त सृष्टि का विनाश हो जायेगा इसलिए कर्म आवश्यक है !

अब कर्म करना आवश्यक है और हमारे आज के कर्म करने से हमारा कल का निर्माण होता है यह बात अटल सत्य है -अब थोड़ा और आगे चलते हैं ,कर्म के पीछे खड़ी है प्रेरणा -कर्म को करने की प्रेरणा वो हमारी बुद्धि से आती है -कर्म अच्छा करना है या बुरा यह प्रेरणा हमें हमारी बुद्धि से मिलती है और हमारी बुद्धि ग्रहो द्वारा संचालित होती हैं -क्यों एक व्यक्ति किसी की चोरी कर लेता है ,कायो एक व्यक्ति किसी की हत्या कर देता है -वही एक व्यक्ति समाज में सेवा करता है -गरीब लोगो की सहायता है -इन सब कर्मो की प्रेरणा बुद्धि से ही आती है !

 

ज्योतिष शास्त्र किसी को भाग्यवादी नहीं बनाता केवल अन्धकार में दीपक दिखता है और यह बताता है यदि इस काल में आपने ऐसे कर्म किये गए तब इसका यह परिणाम हो सकता है -ज्योतिष शास्त्र और एक विद्वान् योग्य ज्योतिष मार्ग दर्शन का कार्य करता है वह गृह स्तिथि का अध्यन कर आपdiyaको आपके कर्मो की दिशा दिखता है आपको आपके नकारात्मक कर्मो से बचाता है ! जिस प्रकार चिकित्सा शास्त्र आपको आपके रोग से अवगत करा कर उसके निदान का मार्ग बताता है उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र आपकी जीवन की कठिनाईयों और बढाओ से आपको अवगत करा कर आपको सही कर्म करने का मार्ग ही बताता है !

 

गर्ग ऋषि कहते हैं -विपरीत समय आने पर ग्रह बुद्धि को हर लेते हैं और शुभ समय आने पर पुनः बुद्धि को ज्ञान से भर देते हैं !

ऋषि नारद का वचन है की हज़ारो हाथी घोड़े और उनसे चतुर्गुणित सेना रखने वाले भी देश की राजा की उतनी सहायता नहीं कर सकते जितनी एक विद्वान् और योग्य ज्योतिषी कर सकता है !

इसलिए करम तो प्रधान है ही जो व्यक्ति कर्म को प्रधान मानते हैं वह उचित कर्म करें और अपने भाग्य का निर्माण करें और वही ज्योतिष शास्त्र भी बहुत ही उत्तम शास्त्र है जो आपको मारदर्शित कर सोने पर सुहागे का कार्य करता है और आपके जीवन को और ज्यादा सुखी और आनंदमय बना देता है .

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